Teaching Jobs: TET परीक्षा Guide, सरकारी मास्टर बनने की पहली सीढ़ी

भारत में ‘गुरु’ का दर्जा भगवान से ऊपर माना गया है। और अगर वो गुरु ‘सरकारी’ हो, तो समाज में उसकी इज्जत (और शादी के बाज़ार में डिमांड) सातवें आसमान पर होती है। “मास्टर साहब” या “मास्टरनी जी” कहलाना सिर्फ एक नौकरी नहीं, एक इमोशन है। समय पर स्कूल जाना, बच्चों का भविष्य बनाना, और दोपहर 2-3 बजे तक घर वापस आ जाना—यह लाइफस्टाइल किसे नहीं चाहिए?

लेकिन रुकिए। B.Ed या BTC (D.El.Ed) की डिग्री ले लेने से आप शिक्षक नहीं बन जाते। वो तो बस कॉलेज की पढ़ाई थी। असली लड़ाई अब शुरू होती है। और इस लड़ाई का सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण चक्रव्यूह है—TET (Teacher Eligibility Test)

चाहे आपको केंद्र सरकार के स्कूलों (Kendriya Vidyalaya) में जाना हो या अपने राज्य के सरकारी प्राइमरी स्कूल में, TET पास किए बिना आप फॉर्म भी नहीं भर सकते। यह आपका ‘गेट पास’ है।

अगर आप इस कन्फ्यूजन में हैं कि CTET क्या है, UPTET क्या है, तैयारी कैसे करें और इसे एक बार में कैसे निकालें, तो यह गाइड आपके लिए है। यहाँ हम किताबी बातें नहीं, तजुर्बे की बातें करेंगे।

Teaching Jobs: TET परीक्षा Guide, सरकारी मास्टर बनने की पहली सीढ़ी

1. TET आखिर है क्या?

सबसे बड़ी गलतफहमी दूर कर लें: TET पास करने से नौकरी नहीं मिलती। TET सिर्फ एक ‘पात्रता परीक्षा’ (Eligibility Test) है।

इसे ऐसे समझें: यह आपके ड्राइविंग लाइसेंस की तरह है। लाइसेंस मिल गया, इसका मतलब यह नहीं कि गाड़ी (नौकरी) भी मिल गई। गाड़ी तो आपको खुद खरीदनी पड़ेगी (भर्ती परीक्षा पास करके)। लेकिन बिना लाइसेंस के आप गाड़ी चला ही नहीं सकते।

TET दो तरह के होते हैं:

  1. CTET (Central TET): यह CBSE कराता है। अगर आपने इसे पास कर लिया, तो आप पूरे भारत में केंद्र सरकार की नौकरियों (KVS, NVS, DSSSB) के लिए अप्लाई कर सकते हैं। कई राज्य (जैसे बिहार, यूपी) भी अब CTET को मान्य मानते हैं।
  2. State TET (UPTET, REET, HTET, etc.): यह हर राज्य का अपना होता है। अगर आपको सिर्फ अपने राज्य में नौकरी चाहिए, तो आप इसे दे सकते हैं।

मेरी सलाह: हमेशा CTET पर फोकस करें। यह साल में दो बार होता है और इसकी वैल्यू पूरे देश में है।

और : Bank PO कैसे बनें 60 हज़ार की सैलरी और मैनेजर वाली इज्जत पूरी गाइड 2026

2. पेपर का पैटर्न

TET में दो पेपर होते हैं। आपको तय करना है कि आपको कौन सा देना है (या दोनों देने हैं)।

  • Paper-1 (Primary Teacher):
    • यह उनके लिए है जो कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं।
    • अगर आपने D.El.Ed (BTC) किया है, तो यह आपका मुख्य पेपर है।
  • Paper-2 (Upper Primary Teacher):
    • यह उनके लिए है जो कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाना चाहते हैं।
    • B.Ed वाले अक्सर दोनों भरते हैं (सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा फैसलों के आधार पर अपनी एलिजिबिलिटी जरूर चेक करें)।

सब्जेक्ट्स का खेल (150 प्रश्न, 150 नंबर, 150 मिनट):

  1. CDP (बाल विकास): 30 नंबर (यही राजा है)।
  2. Language 1 (हिंदी): 30 नंबर।
  3. Language 2 (इंग्लिश/संस्कृत/उर्दू): 30 नंबर।
  4. Maths: 30 नंबर।
  5. EVS (पर्यावरण): 30 नंबर।

(Paper-2 में Maths/EVS की जगह आपका सब्जेक्ट यानी Science/Maths या SST आ जाता है)

पास होने के लिए आपको 90 नंबर (60%) चाहिए (General के लिए)। रिजर्व कैटेगरी के लिए 82 नंबर। निगेटिव मार्किंग नहीं होती, इसलिए सारे गोले भरकर आना ज़रूरी है।

3. तैयारी का ब्रह्मास्त्र

अगर आप TET निकालना चाहते हैं, तो एक बात गांठ बांध लें: आप बच्चे को नहीं हरा सकते।

TET का पूरा पेपर एक ही फिलॉसफी पर चलता है: “बच्चा भगवान है।”

  • अगर बच्चा फेल हुआ, तो बच्चा फेल नहीं हुआ, ‘सिस्टम’ फेल हुआ है।
  • अगर बच्चा क्लास में शोर मचा रहा है, तो उसे पीटना नहीं है, उसे ‘एक्टिविटी’ में लगाना है।

CDP (बाल विकास) सिर्फ एक सब्जेक्ट नहीं है, यह पूरे पेपर की आत्मा है। हिंदी, इंग्लिश और मैथ्स में भी 15-15 नंबर की ‘पैडागोजी’ (पढ़ाने का तरीका) आती है। यानी 150 में से लगभग 90 नंबर इस बात के हैं कि “आप पढ़ाएंगे कैसे?”

तैयारी कैसे करें?

  • जीन पियाजे (Piaget), वाइगोत्सकी (Vygotsky) और कोहलबर्ग (Kohlberg)—इन तीन चाचाओं को रट लो। हर पेपर में इनसे 4-5 सवाल पक्के हैं।
  • “Tags Words” को पहचानें। अगर ऑप्शन में “रटना”, “दंड देना”, “केवल”, “अलग करना” जैसे शब्द हैं, तो वो उत्तर हमेशा गलत होगा। अगर “प्रोत्साहित करना”, “करके सीखना”, “समावेशी शिक्षा” है, तो वो सही होगा।

4. भाषा का चयन

आपको दो भाषाएं चुननी होती हैं।

  • Language 1: वो चुनें जिसमें आप सबसे ज्यादा मजबूत हैं (आमतौर पर हिंदी)।
  • Language 2: यहाँ लोग फंसते हैं। इंग्लिश लें या संस्कृत?

अगर आपकी इंग्लिश बहुत कमजोर है, तो संस्कृत लेना समझदारी है (खासकर हिंदी भाषी राज्यों के छात्रों के लिए)। हिंदी और संस्कृत की व्याकरण (Grammar) काफी मिलती-जुलती है (संधि, समास आदि)। इससे मेहनत आधी हो जाती है। लेकिन अगर आपने इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई की है, तो संस्कृत के चक्कर में न पड़ें, इंग्लिश ही लें।

5. क्या पढ़ना है?

बाज़ार में मोटी-मोटी गाइड्स मिलती हैं—”अरिहंत TET संपूर्ण गाइड।” सच कहूँ? वो कूड़ा हैं। उनमें बहुत सारी गलतियां होती हैं।

सिर्फ दो चीजें चाहिए:

  1. NCERT की किताबें:
    • Paper 1 के लिए: कक्षा 3, 4, 5 की EVS (आस-पास) की किताब। एक-एक लाइन रट लें। सवाल वहीं से आते हैं (जैसे: “स्लॉथ भालू जैसा दिखता है, 17 घंटे सोता है…”)।
    • Paper 2 के लिए: कक्षा 6, 7, 8 की अपने सब्जेक्ट की NCERT।
  2. Previous Year Question Papers (PYQ):
    • यह सबसे बड़ा हथियार है। पिछले 10 साल (खासकर जब से ऑनलाइन पेपर हुए हैं) के CTET के पेपर डाउनलोड करें।
    • उन्हें सॉल्व करें। आप देखेंगे कि सवाल रिपीट नहीं होते, लेकिन ‘पैटर्न’ और ‘कांसेप्ट’ 100% रिपीट होते हैं। जिसने पिछले साल के पेपर अच्छे से लगा लिए, उसका 50% काम हो गया।

6. TET के बाद असली कहानी

मान लीजिये आपने 120 नंबर के साथ TET पास कर लिया। अब क्या? घर पर बैठकर इंतज़ार मत कीजिये। TET का सर्टिफिकेट अब ‘लाइफटाइम’ वैलिड है, तो बार-बार एग्जाम देने की ज़रूरत नहीं (अगर स्कोर सुधारना न हो तो)।

अब आपको ‘Recruitment Exam’ (भर्ती परीक्षा) की तैयारी करनी है।

  • UP वाले: SuperTET की तैयारी करें।
  • Central वाले: KVS (Kendriya Vidyalaya) और DSSSB (Delhi) की तैयारी करें।

TET सिर्फ एक फिल्टर था। असली मेरिट इन एग्जाम्स से बनेगी। यहाँ आपको मैथ्स, साइंस, करंट अफेयर्स और कंप्यूटर भी पढ़ना होगा।

7. सामान्य गलतियां

  • ग्रामर के पीछे पागल होना: CTET में ग्रामर (संज्ञा, सर्वनाम) सिर्फ 2-3 नंबर की आती है। बच्चे पूरा महीना ग्रामर पढ़ते रहते हैं। पैराग्राफ (Passage) की प्रैक्टिस करें, वहां से 15 नंबर मुफ्त के मिलते हैं।
  • टाइम मैनेजमेंट: 150 मिनट, 150 सवाल। यानी 1 सवाल के लिए 1 मिनट। कई बार मैथ्स या पैराग्राफ पढ़ने में बच्चे इतना समय लगा देते हैं कि आखिरी के 20 सवाल बिना पढ़े ‘तुक्का’ मारने पड़ते हैं।
  • Overconfidence: “अरे, B.Ed में तो पढ़ा था, हो जाएगा।” B.Ed की पढ़ाई सब्जेक्टिव थी, यहाँ ऑब्जेक्टिव है। दोनों में जमीन-आसमान का फर्क है।

शिक्षक बनना एक जिम्मेदारी का काम है, और TET यह परखता है कि आपके अंदर वो ‘धीरज’ (Patience) और ‘समझ’ है या नहीं।

घबराएं नहीं। यह भारत के सबसे आसान कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स में से एक है। आपको बस एक बच्चे की तरह सोचना है। जिस दिन आप यह समझ गए कि एक 8 साल का बच्चा दुनिया को कैसे देखता है, उस दिन आप TET पास कर लेंगे।अपने नोट्स खुद बनाएं, NCERT पढ़ें और पुराने पेपर्स को अपनी गीता मान लें। सरकारी स्कूल का गेट आपका इंतज़ार कर रहा है।

Leave a Comment