एक कड़वा सच बताऊं? भारत में हम नौकरी को ‘एहसान’ मानते हैं। जब HR का कॉल आता है कि “Congratulations, you are selected,” तो हमारे अंदर खुशी के लड्डू फूटते हैं। हमें लगता है कि बस अब जल्दी से ‘Yes’ बोल दो, कहीं वो अपना इरादा न बदल लें। कहीं वो ऑफर वापस न ले लें।
इसी डर का फायदा कंपनियां उठाती हैं। एक सर्वे के मुताबिक, 60% भारतीय अपनी सैलरी नेगोशिएट (Negotiate) ही नहीं करते। जो ऑफर मिलता है, चुपचाप साइन कर देते हैं।
आपको पता है उस वक्त टेबल की दूसरी तरफ बैठा HR क्या सोच रहा होता है? वो सोच रहा होता है—“बच गए! मेरे पास इसे देने के लिए 2 लाख और थे, लेकिन ये तो कम में ही मान गया।”
सैलरी नेगोशिएट करना कोई गुनाह नहीं है। यह बिज़नेस है। आप अपना समय और स्किल बेच रहे हैं, और कंपनी उसे खरीद रही है। अगर आप बाज़ार में सब्जी लेते वक्त मोलभाव कर सकते हैं, तो अपने करियर के साथ क्यों नहीं?
अगर आपको भी पैसों की बात करने में पसीने छूटते हैं, तो यह गाइड आपके लिए है। यहाँ कोई किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि वो प्रैक्टिकल तरीके हैं जिनसे आप अपनी सैलरी 20-30% तक बढ़ा सकते हैं।

1. अपना होमवर्क करके जाओ
ज्यादातर लोग नेगोशिएशन में इसलिए हारते हैं क्योंकि उन्हें पता ही नहीं होता कि उनकी कीमत क्या है। अगर आप HR से कहेंगे—“मुझे ज्यादा पैसे चाहिए क्योंकि महंगाई बढ़ गई है,” तो वो हंसेंगे।
लेकिन अगर आप कहेंगे—“मार्केट रिसर्च के हिसाब से, मेरे जैसे 4 साल के अनुभव वाले Java Developer की सैलरी 12 लाख होनी चाहिए, और आप मुझे 9 लाख ऑफर कर रहे हैं,” तो वो सुनेंगे।
पता कैसे करें?
- Glassdoor / AmbitionBox: इन वेबसाइट्स पर जाकर देखें कि उस कंपनी में और उस रोल के लिए औसतन कितनी सैलरी मिलती है।
- LinkedIn: अपने ही फील्ड के किसी दोस्त या सीनियर से पूछें। शर्म मत करो। पूछो—“भाई, 3 साल के एक्सपीरियंस पर इंडस्ट्री स्टैंडर्ड क्या चल रहा है?”
जब आपके पास डेटा (Data) होता है, तो आप ‘मांग’ नहीं रहे होते, आप ‘तर्क’ (Logic) दे रहे होते हैं।
2. नियम नंबर 1
इंटरव्यू के दौरान एक सवाल ज़रूर आता है: “What is your current CTC and expected CTC?” (आपकी अभी की सैलरी क्या है और कितनी उम्मीद है?)
यह एक जाल (Trap) है। जिसने पहले नंबर बोला, वो हार गया।
अगर आपने कम बोल दिया, तो उन्होंने पैसे बचा लिए। अगर आपने बहुत ज्यादा बोल दिया, तो वो आपको रिजेक्ट कर सकते हैं।
बचने का तरीका: स्मार्ट बनें। जवाब दें: “सर/मैम, अभी मेरा फोकस रोल और जिम्मेदारियों को समझने पर है। अगर हम एक-दूसरे के लिए सही फिट हैं, तो मुझे यकीन है कि हम एक सही नंबर पर सहमत हो जाएंगे। वैसे, इस रोल के लिए आपका बजट (Budget) क्या है?”
गेंद उनके पाले में डाल दो। उन्हें अपना बजट बताने दो। मान लो उनका बजट 15 लाख है और आपने डर के मारे 12 लाख बोल दिया होता, तो आपका 3 लाख का नुकसान सीधा-सीधा हो जाता।
3. ‘खामोशी’ का इस्तेमाल करो
मान लीजिये आपको ऑफर मिला। HR ने फोन पर कहा: “हम आपको सालाना 8 लाख का पैकेज दे रहे हैं।”
ज्यादातर लोग हड़बड़ी में कहते हैं—“ओके, ठीक है! थैंक यू!”
रुकिए। जब वो नंबर बताएं, तो कुछ सेकंड के लिए चुप हो जाएं। कुछ मत बोलें। यह सन्नाटा (Silence) सामने वाले को असहज (Uncomfortable) कर देता है।
फिर धीरे से बोलें: “हम्म… 8 लाख।” और फिर चुप हो जाएं।
अक्सर HR खुद ही बोल पड़ते हैं—“वैसे हमारे पास थोड़ी गुंजाइश है, मैं मैनेजर से बात करके देखता हूँ।” आपने बिना लड़े पैसे बढ़ा लिए। इसे ‘The Flinch’ कहते हैं।
4. हां, लेकिन…
अब मान लो आपको ऑफर कम लग रहा है और आपको काउंटर-ऑफर देना है। गुस्सा नहीं होना है। एटीट्यूड नहीं दिखाना है।
एक सैंडविच बनाओ:
- तारीफ (Positive): “मुझे यह ऑफर पाकर बहुत खुशी हुई और मैं टीम ज्वाइन करने के लिए बहुत एक्साइटेड हूँ।”
- मांग (Negative/Ask): “लेकिन, मेरे अनुभव और मार्केट रेट को देखते हुए, मैं 10 लाख के आसपास उम्मीद कर रहा था।”
- उम्मीद (Positive): “अगर हम इस नंबर तक पहुँच सकें, तो मैं आज ही साइन करने को तैयार हूँ।”
आखिरी लाइन जादू है—“मैं आज ही साइन करने को तैयार हूँ।” HR को अपनी वैकेंसी बंद करनी होती है। अगर उन्हें पता चले कि थोड़ा सा पैसा बढ़ाकर आप तुरंत ज्वाइन कर लेंगे, तो वो एप्रूवल ले आएंगे।
5. सिर्फ Base Salary ही सब कुछ नहीं है
कई बार सच में कंपनी का बजट टाइट होता है। HR चाहकर भी आपकी बेसिक सैलरी नहीं बढ़ा सकता। तो क्या करें? ऑफर छोड़ दें?
नहीं। अगर वो ‘सैलरी’ नहीं बढ़ा सकते, तो ‘पर्क्स’ (Perks) मांगो। याद रखिये, सैलरी पैकेज सिर्फ एक नंबर नहीं है।
आप ये मांग सकते हैं:
- Joining Bonus: “ठीक है, अगर सैलरी नहीं बढ़ सकती, तो क्या मुझे 50,000 का वन-टाइम जॉइनिंग बोनस मिल सकता है?” (कंपनियों के लिए यह देना आसान होता है)।
- Work From Home: “क्या मैं हफ्ते में 2 दिन घर से काम कर सकता हूँ?” (इससे आपका आने-जाने का खर्चा और समय बचेगा)।
- Extra Leaves: ज्यादा छुट्टियां मांग लो।
- Variable Pay / Stocks: अगर स्टार्टअप है तो शेयर मांग लो।
सूखी रोटी मत खाओ, साथ में अचार या चटनी भी मांगो।
6. ऑफर लेटर हाथ में होने की ताकत
नेगोशिएशन की सबसे बड़ी ताकत क्या है? “Walk Away Power” (मना करके चले जाने की ताकत)।
अगर आप बेरोजगार हैं और आपको नौकरी की सख्त ज़रूरत है, तो नेगोशिएट करना मुश्किल है। लेकिन अगर आपके पास पहले से नौकरी है, या आपके हाथ में किसी और कंपनी का ऑफर है, तो आप राजा हैं।
HR को बताएं: “मेरे पास एक और ऑफर है जो मुझे 12 लाख दे रहा है, लेकिन मुझे आपकी कंपनी का कल्चर ज्यादा पसंद है। अगर आप मैच कर सकें, तो मैं आपको चुनूंगा।” कम्पटीशन का डर हमेशा काम करता है।
7. डरना बंद करो
सबसे बड़ा डर क्या है? “अगर मैंने ज्यादा पैसे मांगे, तो कहीं वो गुस्सा होकर ऑफर ही कैंसिल न कर दें?”
सुनिए, ऐसा कभी नहीं होता। (99% मामलों में नहीं)। कंपनी ने आपका इंटरव्यू लिया, टेस्ट लिया, 50 लोगों को रिजेक्ट किया और आपको चुना। उन्होंने आप पर समय और पैसा खर्च किया है। सिर्फ इसलिए कि आपने 10% ज्यादा मांग लिया, वो आपको रिजेक्ट नहीं करेंगे। सबसे बुरा जो हो सकता है, वो ये कहेंगे—“सॉरी, हमारा बजट इतना ही है, हम नहीं बढ़ा सकते।”
बस। फिर आप तय कर लेना कि ज्वाइन करना है या नहीं। लेकिन वो ऑफर वापस नहीं लेंगे।
याद रखिये, आपकी सैलरी वही होगी जो आप नेगोशिएट करेंगे, वो नहीं जो आप डिजर्व करते हैं।
आपकी कंपनी कोई चैरिटी नहीं चला रही। वो प्रॉफिट कमाने बैठे हैं। अगर आप खुद अपने लिए आवाज़ नहीं उठाएंगे, तो कोई और नहीं उठाएगा।
तो अगली बार जब HR का कॉल आए, तो गहरी सांस लें, मुस्कुराएं, और कहें—“क्या हम इस नंबर पर थोड़ा और विचार कर सकते हैं?”