भारत में सरकारी नौकरी का अपना एक अलग ही नशा है, लेकिन ‘पुलिस की वर्दी’ का नशा सबसे अलग है। जब आप खाकी वर्दी पहनकर, बुलेट पर बैठकर मोहल्ले से निकलते हैं, तो लोग सिर्फ आपको नहीं देखते, वो उस ‘पावर’ को देखते हैं जो आपके कंधों पर होती है।
“पुलिसवाला” बनना सिर्फ एक रोजगार नहीं है। यह एक जिम्मेदारी है, और सच कहें तो, मिडिल क्लास परिवार के लड़के-लड़कियों के लिए यह इज्जत कमाने का सबसे तेज़ रास्ता है। 12वीं पास करते ही अगर आपको सरकारी नौकरी चाहिए, तो पुलिस कांस्टेबल (सिपाही) से बेहतर मौका शायद ही कोई और हो।
लेकिन दोस्तों, यह रास्ता अब आसान नहीं रहा। 2026 में, जब एक कांस्टेबल की पोस्ट के लिए बी.टेक (B.Tech) और एमबीए (MBA) वाले भी लाइन में खड़े हैं, तो आपका नंबर कैसे आएगा?
सिर्फ दौड़ लगाने से या सिर्फ किताब रटने से काम नहीं चलेगा। आपको दोनों में ‘बाहुबली’ बनना पड़ेगा। चलिए, आज बात करते हैं कि इस भीड़ को चीरकर आप अपने बदन पर वो वर्दी कैसे सजा सकते हैं।

1. सबसे पहले क्या आप इसके काबिल हैं?
पुलिस की भर्ती हर राज्य (State) की अलग होती है। यूपी पुलिस अलग है, दिल्ली पुलिस अलग है, और बिहार/राजस्थान पुलिस अलग है। लेकिन 90% नियम एक जैसे होते हैं।
- पढ़ाई (Education): आपको सिर्फ 12वीं पास होना चाहिए। (किसी भी स्ट्रीम से—आर्ट्स, साइंस, कॉमर्स सब चलता है)। परसेंटेज का कोई लफड़ा नहीं है, बस पास होने चाहिए।
- उम्र (Age): यह सबसे बड़ा खेल है। आमतौर पर 18 से 25 साल (जनरल कैटेगरी) की उम्र मांगी जाती है। OBC/SC/ST को 3 से 5 साल की छूट मिलती है।
- सावधानी: पुलिस भर्ती में उम्र बहुत मायने रखती है। अगर आप 24 के हो गए हैं और भर्ती नहीं आ रही, तो यह तनाव की बात है। इसलिए जैसे ही फॉर्म निकले, तुरंत भर दें।
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2. शरीर
बैंक या एसएससी की नौकरी में अगर आपकी हाइट कम है या चश्मा लगा है, तो चल जाएगा। पुलिस में नहीं चलेगा। यहाँ दिमाग से पहले शरीर देखा जाता है।
- ऊंचाई (Height):
- लड़कों के लिए: आमतौर पर 168 सेमी (लगभग 5 फीट 6 इंच)।
- लड़कियों के लिए: 152 सेमी।
- (पहाड़ी क्षेत्रों और ST वालों को थोड़ी छूट मिलती है)।
- सीना (Chest – लड़कों के लिए):
- बिना फुलाए: 79 सेमी।
- फुलाने के बाद: 84 सेमी (यानी 5 सेमी का फैलाव ज़रूरी है)।
- देसी टिप: जिम में सिर्फ बाइसेप्स मत बनाओ, ‘पुश-अप्स’ (Push-ups) मारो और दौड़ लगाओ ताकि फेफड़े मजबूत हों।
3. भर्ती प्रक्रिया
पुलिस कांस्टेबल बनने के लिए आपको तीन दरवाजों को तोड़ना होगा। और मज़ेदार बात यह है कि हर राज्य का क्रम अलग होता है।
- कहीं पहले दौड़ होती है, फिर पेपर (जैसे पहले होता था)।
- कहीं पहले पेपर होता है, फिर दौड़ (जैसे यूपी और दिल्ली में आजकल हो रहा है)।
हम उस पैटर्न की बात करेंगे जो आजकल ज्यादा चल रहा है: Written Exam → Physical Test → Medical.
(A) लिखित परीक्षा
यह छंटनी का दौर है। लाखों की भीड़ को हज़ारों में करने का तरीका। पेपर बहुत टफ नहीं होता (10वीं-12वीं लेवल का होता है), लेकिन कम्पटीशन टफ होता है।
आपको 4 विषयों पर पकड़ बनानी है:
- सामान्य ज्ञान (GK/GS): इसमें अपने राज्य की GK (जैसे यूपी जीके, बिहार जीके) बहुत ज़रूरी है। साथ में करंट अफेयर्स और इतिहास-भूगोल।
- हिंदी (Hindi): यह ‘गेम चेंजर’ है। अंग्रेजी नहीं आती, हिंदी आती है। इसमें पूरे नंबर लाए जा सकते हैं। मुहावरे, विलोम, संधि—इन्हें घोट कर पी जाओ।
- रीजनिंग (Reasoning): पुलिस एग्जाम में रीजनिंग का वेटेज सबसे ज्यादा होता है। यह आसान भी है और स्कोरिंग भी।
- गणित (Maths): बेसिक गणित आता है। अगर आप गणित में कमजोर भी हैं, तो बाकी तीन विषयों से काम चल सकता है।
(B) फिजिकल टेस्ट (PST/PET): असली अग्निपरीक्षा
पेपर निकाल लिया, लेकिन दौड़ नहीं निकली, तो सब बेकार। हर राज्य का मानक अलग है, लेकिन औसतन:
- लड़कों को: 4.8 किलोमीटर की दौड़ 25 मिनट में (यूपी पुलिस का मानक)। या 1600 मीटर की दौड़ 6 मिनट में (दिल्ली पुलिस/आर्मी स्टाइल)।
- लड़कियों को: 2.4 किलोमीटर की दौड़ 14 मिनट में।
सच्चाई: यह दौड़ एक दिन में तैयार नहीं होती। जो बच्चे सोचते हैं कि “पहले पेपर का रिजल्ट आ जाए, फिर दौड़ना शुरू करूँगा,” वो पक्का फेल होते हैं। पढ़ाई के साथ-साथ सुबह 1 घंटा ग्राउंड पर पसीना बहाना शुरू कर दें। शिन पेन (Shin Pain) होगा, पैर सूजेंगे, लेकिन रुकना नहीं है।
(C) मेडिकल टेस्ट
यहाँ डॉक्टर आपको ऊपर से नीचे तक चेक करते हैं।
- आंखें: 6/6 या 6/9 होनी चाहिए। कलर ब्लाइंडनेस (रंगों में फर्क न कर पाना) बिल्कुल नहीं चलेगा।
- घुटने (Knock Knees): सावधान होकर सीधे खड़े हों। क्या आपके घुटने आपस में टकराते हैं? अगर हाँ, तो दिक्कत है।
- पैर (Flat Foot): आपके पैर के तलवे में एक ‘कर्व’ (Gadd) होना चाहिए। अगर तलवा एकदम सपाट है, तो आप अनफिट हैं।
4. तैयारी की रणनीति
कोचिंग जाना ज़रूरी है? सच कहूँ तो, नहीं। कांस्टेबल का सिलेबस इतना बेसिक है कि आप घर बैठकर यूट्यूब और किताबों से पढ़ सकते हैं।
- किताबें:
- जी.के. के लिए: लुसेंट (Lucent) की नीली किताब। (यह पुलिस भर्ती की बाइबिल है)।
- हिंदी के लिए: आदित्य पब्लिकेशन (सफेद कवर वाली)।
- रीजनिंग: आर.के. झा (अरिहंत)।
- पिछले साल के पेपर्स (Previous Year Papers): यह सबसे ज़रूरी है। इसे लगाने से आपको पता चलेगा कि सवाल कहां से पूछे जा रहे हैं।
- टाइम टेबल:
- सुबह 5 से 7: दौड़ और एक्सरसाइज (शरीर बनाना है)।
- दिन में 4-5 घंटे: पढ़ाई (जीके और रीजनिंग पर फोकस)।
- रात में 1 घंटा: रिविजन।
5. दिल्ली पुलिस vs यूपी पुलिस vs अन्य राज्य
- Delhi Police: यह केंद्र सरकार (Ministry of Home Affairs) के अंडर आती है। सैलरी सबसे ज्यादा है, सुविधाएँ बेहतरीन हैं और पोस्टिंग हमेशा दिल्ली में रहेगी। लेकिन यहाँ ड्राइविंग लाइसेंस (LMV) अनिवार्य है।
- UP/Bihar/MP/Rajasthan Police: यहाँ वैकेंसी हज़ारों में आती है (कभी-कभी 50,000 एक साथ)। यहाँ होम डिस्ट्रिक्ट (अपने घर के पास) पोस्टिंग मिलने का चांस रहता है।
6. एक कड़वी सलाह
पुलिस भर्ती के नाम पर बहुत से दलाल (Brokers) सक्रिय हो जाते हैं। “5 लाख दे दो, पेपर निकलवा दूंगा।” “फिजिकल में सेटिंग करवा दूंगा।”
इन चक्करों में मत पड़ना। 2026 में सिस्टम बहुत हाई-टेक हो गया है। बायोमेट्रिक अंगूठा लगता है, सीसीटीवी कैमरे होते हैं। अगर पकड़े गए, तो न सिर्फ पैसे जाएंगे, बल्कि जेल होगी और जिंदगी भर के लिए सरकारी नौकरी के दरवाजे बंद हो जाएंगे। अपनी मेहनत पर भरोसा रखो। जिसने पसीना बहाया है, उसका सिलेक्शन होता है।
कांस्टेबल की नौकरी आसान नहीं है। 12-12 घंटे की ड्यूटी होती है। कभी त्यौहार पर छुट्टी नहीं मिलती। लेकिन जब कोई गरीब अपनी फरियाद लेकर आपके पास आता है, या जब आप वर्दी पहनकर अपने गांव जाते हैं, तो वो सुकून सारी थकान मिटा देता है।अगर आपके सीने में वो आग है, और पैरों में जान है, तो मैदान आपका इंतज़ार कर रहा है। आज ही जूते कस लो, और अपनी दौड़ शुरू करो। जय हिन्द!