UPSC परीक्षा की पूरी जानकारी: कलेक्टर बनने का सपना और मुखर्जी नगर की हकीकत

भारत में ‘पावर’ की दो ही परिभाषाएं हैं—या तो आप नेता हों, या फिर IAS/IPS अफसर। जिस दिन रिजल्ट आता है, उस दिन अखबारों में उन टॉपर्स की फोटो छपती है जो मुस्कुराते हुए विक्ट्री साइन दिखा रहे होते हैं। उन्हें देखकर हर भारतीय मां-बाप के दिल में एक ही ख्याल आता है—“मेरा बेटा या बेटी भी कलेक्टर बने।”

जिले का राजा। लाल बत्ती (अब नीली बत्ती) वाली गाड़ी। और वो रुतबा कि बड़े-बड़े मंत्री भी फाइल साइन करवाने के लिए इंतज़ार करें।

लेकिन दोस्त, यह चमक-दमक सिर्फ सिक्के का एक पहलू है। UPSC (Union Public Service Commission) जिसे हम सिविल सर्विसेज एग्जाम (CSE) कहते हैं, यह दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है। हर साल 10 लाख से ज्यादा लोग फॉर्म भरते हैं, और चुनकर कितने आते हैं? मुश्किल से 800-900।

यानी सफलता का प्रतिशत 0.1% से भी कम।

अगर आप इस ‘आग के दरिया’ में कूदने का मन बना रहे हैं, तो आपको कोचिंग के ब्रोशर वाली चिकनी-चुपड़ी बातें नहीं, बल्कि वो सच जानना होगा जो आपको पुराने चावल (Experienced Aspirants) ही बता सकते हैं।

चलिए, इस परीक्षा की पूरी ‘सर्जरी’ करते हैं।

UPSC परीक्षा की पूरी जानकारी

UPSC आखिर है क्या?

ज्यादातर लोगों को लगता है कि UPSC का मतलब सिर्फ IAS (Indian Administrative Service) है। ऐसा नहीं है।

UPSC एक आयोग है जो परीक्षा लेता है। इस एक परीक्षा से आपको 24 अलग-अलग सेवाओं में जाने का मौका मिलता है। आपकी रैंक (Rank) तय करती है कि आप क्या बनेंगे:

  1. Top Rankers: IAS (कलेक्टर, सचिव) या IFS (विदेश सेवा – राजदूत)।
  2. High Rankers: IPS (पुलिस कप्तान/SP) या IRS (इनकम टैक्स कमिश्नर)।
  3. बाकी Ranks: रेलवे, डिफेंस अकाउंट्स, पोस्टल सर्विस, आदि।

यह परीक्षा सिर्फ रट्टा मारने वालों के लिए नहीं है। यह एक व्यक्तित्व (Personality) की परीक्षा है। वो यह नहीं ढूंढ रहे कि आपको कितना पता है, वो यह ढूंढ रहे हैं कि आप ‘प्रेशर’ में कैसे फैसले लेते हैं।

इस खेल के तीन पड़ाव

UPSC कोई वन-डे मैच नहीं है। यह टेस्ट मैच है। यह प्रक्रिया पूरे एक साल चलती है।

1. Prelims

यह सिलेक्शन के लिए नहीं है, यह रिजेक्शन के लिए है। लाखों की भीड़ को कम करने के लिए। इसमें दो पेपर होते हैं:

  • GS Paper 1: इतिहास, भूगोल, राजनीति, करंट अफेयर्स। इसी से कट-ऑफ बनती है।
  • CSAT (Paper 2): मैथ, रीजनिंग और इंग्लिश। यह सिर्फ पास करना होता है (33% नंबर), लेकिन आजकल आर्ट्स बैकग्राउंड वालों के लिए यह सबसे बड़ा विलेन बन गया है। बड़े-बड़े धुरंधर GS में टॉप कर जाते हैं पर CSAT में फेल हो जाते हैं।

2. Mains

अगर प्रीलिम्स निकल गया, तो स्वागत है असली युद्ध में। यहाँ आपको गोले (MCQ) नहीं भरने, बल्कि लिखना है। और बहुत लिखना है। कुल 9 पेपर होते हैं। 5-7 दिन तक आपके हाथ सूज जाएंगे लिखते-लिखते।

  • Essay (निबंध): यहाँ आपकी सोच दिखती है।
  • GS 1, 2, 3, 4: सब कुछ पढ़ना होगा। इतिहास से लेकर एथिक्स (नीतिशास्त्र) तक।
  • Optional Subject (वैकल्पिक विषय): यह गेम-चेंजर है। आपको एक विषय चुनना होता है (जैसे हिंदी साहित्य, इतिहास, सोशियोलॉजी आदि)। अगर आपने गलत विषय चुन लिया, तो आप रेस से बाहर हैं। इसे बहुत सोच-समझकर चुनें।

3. Interview

मेन्स क्लियर करने वाले चुनिंदा लोग यहाँ पहुँचते हैं। यहाँ आपसे यह नहीं पूछा जाएगा कि “अकबर का जन्म कब हुआ था” (वो मेन्स में पूछ चुके हैं)। यहाँ पूछा जाएगा: “अगर आपके जिले में दंगा हो जाए, और नेता जी का फोन आए कि पुलिस मत भेजो, तो आप क्या करेंगे?” वो आपकी ईमानदारी, आपका धैर्य और आपकी निर्णय क्षमता (Decision Making) चेक करते हैं।

और : SSC CGL परीक्षा की पूरी जानकारी ‘Mini IAS’ बनने का सपना और हकीकत

तैयारी की रणनीति

YouTube पर टॉपर्स के इंटरव्यू देखकर गुमराह मत होना। हर टॉपर जीतने के बाद अपनी एक नई कहानी सुनाता है। “मैं तो बस 4 घंटे पढ़ता था” — यह सफेद झूठ है।

हकीकत यह है:

1. NCERT ही भगवान है अगर आपने कक्षा 6 से 12 की NCERT नहीं पढ़ी, तो स्टैंडर्ड किताबें (जैसे लक्ष्मीकांत या स्पेक्ट्रम) सिर के ऊपर से निकल जाएंगी। अपना बेस मजबूत करें। इतिहास और भूगोल के लिए NCERT के बिना काम नहीं चलेगा।

2. अखबार (Newspaper) से इश्क करना होगा UPSC में अब वो ज़माना गया जब किताबों से सवाल आते थे। अब सवाल ‘करंट’ से जुड़कर आते हैं। ‘The Hindu’ या ‘Indian Express’ पढ़ना आपकी मजबूरी है। हिंदी माध्यम वालों के लिए ‘दैनिक जागरण (राष्ट्रीय संस्करण)’ या ‘जनसत्ता’ ठीक है, लेकिन संपादकीय (Editorial) पढ़ना ही पड़ेगा।

3. लिखने की आदत (Answer Writing) आप कितना भी पढ़ लें, अगर आप उसे 150 शब्दों में, 7 मिनट के अंदर कागज पर उतार नहीं सकते, तो आपका ज्ञान बेकार है। रोज़ कम से कम 2 उत्तर लिखने की प्रैक्टिस करें। शुरुआत में आप बहुत बेकार लिखेंगे, लेकिन धीरे-धीरे सुधार होगा।

4. सिलेबस को रट लो UPSC का सिलेबस एक महासागर है। अगर आपको यह याद नहीं है कि सिलेबस में क्या है, तो आप भटक जाएंगे। आपको पता होना चाहिए कि अखबार में क्या पढ़ना है और क्या छोड़ना है। सिलेबस आपका कंपास (Compass) है।

कोचिंग ज़रूरी है या नहीं?

दिल्ली का राजेंद्र नगर और करोल बाग कोचिंग सेंटर्स से भरा पड़ा है जो आपसे 2-2 लाख रुपये फीस मांगते हैं। क्या कोचिंग ज़रूरी है? जवाब: नहीं।

आज के दौर में (2026 में), सब कुछ इंटरनेट पर है।

  • YouTube पर पूरा सिलेबस फ्री में पढ़ाया गया है।
  • Telegram पर नोट्स मिल जाते हैं।
  • Toppers की कॉपी ऑनलाइन उपलब्ध हैं।

कोचिंग आपको एक माहौल देती है और एक दिशा देती है। लेकिन अगर आप अनुशासित (Disciplined) हैं, तो घर बैठकर भी तैयारी की जा सकती है। कई ऐसे टॉपर्स हैं जिन्होंने कभी दिल्ली का मुंह नहीं देखा और पहले प्रयास में IAS बने।

कड़वा सच

यह बात कोई कोचिंग वाला नहीं बताएगा। UPSC एक जुआ है। यहाँ मेहनत करने वाले भी फेल होते हैं। कभी 1 नंबर से, कभी इंटरव्यू में। ऐसे लोग हैं जो 6 साल दिल्ली में रहे, जवानी के सुनहरे साल किताबों में खपा दिए, और अंत में खाली हाथ घर लौटे।

इसलिए, इमोशनल होकर तैयारी मत करें। प्रैक्टिकल बनें।

  • अपने पास एक Plan B रखें।
  • साथ में State PCS (UPPSC, BPSC, RAS) के एग्जाम भी दें।
  • कोई स्किल सीख कर रखें। अगर 2-3 अटेम्प्ट में नहीं होता है, तो ज़िंदगी खत्म नहीं होती। दुनिया में और भी बहुत कुछ है।

UPSC सिर्फ एक परीक्षा नहीं है, यह एक तपस्या है। यह आपसे आपके दोस्त मांगेगी, आपके त्यौहार मांगेगी, आपकी नींद मांगेगी और आपका सुकून मांगेगी। आपको खुद को एक कमरे में बंद करना होगा जब बाकी दुनिया मजे कर रही होगी।

क्या आप अगले 2 साल तक गायब होने के लिए तैयार हैं? क्या आप रोज 8-10 घंटे एक ही कुर्सी पर बैठने को तैयार हैं? क्या आप फेल होने पर दोबारा उठ खड़े होने का जिगर रखते हैं?

अगर जवाब ‘हाँ’ है, तो स्वागत है। यह सफर मुश्किल ज़रूर है, लेकिन अगर मंज़िल मिल गई, तो यह न सिर्फ आपकी, बल्कि आपकी आने वाली सात पुश्तों की ज़िंदगी बदल देगा।

Leave a Comment