Boss से ‘पंगा’ नहीं, ‘दोस्ती’ करें बिना चमचागिरी के

कॉर्पोरेट जगत में एक पुरानी कहावत है: “Employees leave managers, not companies.” (कर्मचारी कंपनी छोड़कर नहीं जाते, वो अपने बॉस को छोड़कर जाते हैं। हम सब की लाइफ में एक ऐसा बॉस ज़रूर आया है या अभी भी है जिसे देखते ही रास्ता बदलने का मन करता है। जिसके केबिन में जाने से पहले दिल की धड़कन तेज हो जाती है। और जिसका नाम मोबाइल स्क्रीन पर चमकते ही ‘संडे’ का मूड भी ‘मंडे’ जैसा हो जाता है।

ज्यादातर लोग अपने बॉस को “दुश्मन” या “विलेन” मान लेते हैं। हम चाय की टपरी पर दोस्तों के साथ बैठकर बॉस की बुराई करते हैं। “उसको कुछ नहीं आता,” “सारा काम मुझसे करवाता है,” “क्रेडिट खुद ले जाता है।”

यह सब भड़ास निकालने के लिए ठीक है, लेकिन करियर के लिए? यह जहर है।

सच्चाई कड़वी है लेकिन सुन लो: आपकी तरक्की (Promotion), आपकी सैलरी (Appraisal), और आपकी मानसिक शांति (Peace of Mind)—इन तीनों की चाबी आपके बॉस की जेब में है। अगर उससे रिश्ते खराब हैं, तो आप कितना भी अच्छा काम कर लें, आप आगे नहीं बढ़ पाएंगे।

तो क्या करें? क्या उनकी ‘चमचागिरी’ शुरू कर दें? बिल्कुल नहीं। “चमचागिरी” और “Smart Management” में बहुत बड़ा फर्क है। आज हम सीखेंगे एक ऐसी कला जिसे मैनेजमेंट की दुनिया में “Managing Up” कहते हैं। इसका मतलब है—अपने बॉस को ऐसे मैनेज करना कि आपका काम आसान हो जाए और आपकी ग्रोथ पक्की हो जाए।

चलिए समझते हैं कि बॉस को अपना फैन कैसे बनाएं (बिना आत्मसम्मान खोए)।

Boss से 'पंगा' नहीं, 'दोस्ती' करें बिना चमचागिरी के

1. बॉस का ‘यूज़र मैनुअल’ पढ़ें

हर बॉस अलग होता है। सबसे बड़ी गलती हम यह करते हैं कि हम अपने तरीके से काम करते हैं, जबकि हमें उनके तरीके से काम करना चाहिए।

अपने बॉस को ऑब्जर्व करें और इन सवालों के जवाब ढूंढें:

  • Reader vs. Listener: क्या उन्हें लंबी रिपोर्ट पढ़ना पसंद है (Reader)? या वो कहते हैं “मुझे बस 2 मिनट में समझा दो” (Listener)? अगर वो ‘लिसनर’ हैं और आप उन्हें 4 पेज का ईमेल भेज रहे हैं, तो वो कभी नहीं पढ़ेंगे और आप फ्रस्ट्रेट होंगे।
  • Morning vs. Evening: उनका मूड कब अच्छा रहता है? कुछ बॉस सुबह-सुबह बात करना पसंद करते हैं, कुछ शाम को रिलैक्स होकर। अपनी प्रॉब्लम तभी लेकर जाएं जब उनका ‘टाइम’ सही हो।
  • Detail vs. Big Picture: क्या वो माइक्रो-मैनेजर हैं (हर छोटी चीज़ जानना चाहते हैं)? या वो कहते हैं “मुझे बस रिजल्ट बताओ”?

जिस दिन आप उनके काम करने के स्टाइल (Style) को समझ गए, आधी लड़ाई आप वहीं जीत जाएंगे।

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2. सरप्राइज पार्टी न दें

बॉस को सरप्राइज पसंद होते हैं, लेकिन सिर्फ उनके जन्मदिन पर। काम में नहीं। एक मैनेजर का सबसे बड़ा डर होता है—अचानक आया संकट।

कल्पना कीजिये: प्रोजेक्ट की डेडलाइन कल है। और आप आज शाम 5 बजे जाकर कह रहे हैं—“सर, एक प्रॉब्लम हो गई है, काम पूरा नहीं हो पाएगा।” आपका बॉस आग बबूला हो जाएगा। और यह जायज भी है।

नियम: बुरी खबर को जल्दी सुनाएं। अगर आपको लग रहा है कि कोई काम अटकने वाला है, तो बॉस को पहले ही बता दें। “सर, मुझे लग रहा है कि वेंडर की तरफ से देरी हो सकती है। मैं कोशिश कर रहा हूँ, लेकिन शायद हम डेडलाइन मिस कर दें।”

जब आप पहले बता देते हैं, तो बॉस आपके साथ मिलकर Solution ढूंढता है। जब आप लास्ट मिनट पर बताते हैं, तो वो आपको Problem का हिस्सा मानता है।

3. रोते हुए बच्चे न बनें

कुछ एम्प्लॉयी ऐसे होते हैं जो बॉस के पास सिर्फ शिकायतें लेकर जाते हैं। “सर, इंटरनेट नहीं चल रहा।” “सर, क्लाइंट फ़ोन नहीं उठा रहा।” “सर, राहुल काम नहीं कर रहा।”

ऐसे लोगों को बॉस “Whiners” (रोने वाले) कहते हैं। बॉस को ऐसे लोग पसंद हैं जो “Problem Solvers” हों।

अगली बार जब कोई दिक्कत आए, तो बॉस के पास खाली हाथ न जाएं। तरीका: “बॉस, एक प्रॉब्लम है। क्लाइंट नाराज़ है। लेकिन मैंने सोचा है कि हम दो चीज़ें कर सकते हैं: या तो हम उन्हें डिस्काउंट दे दें, या फिर हम डिलीवरी फ़ास्ट कर दें। मुझे लगता है दूसरा ऑप्शन बेहतर है। आप क्या कहते हैं?”

जब आप ऐसा करते हैं, तो आप उनका काम आसान कर रहे हैं। उन्हें बस ‘हां’ या ‘ना’ में फैसला लेना है। ऐसे एम्प्लॉयी को हर बॉस अपने साथ रखना चाहता है।

4. उनकी सफलता में ही आपकी सफलता है

यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन सच है: आपका काम है अपने बॉस को ‘हीरो’ बनाना। याद रखिये, आपके बॉस का भी कोई बॉस है। उन पर भी प्रेशर है।

अगर आप अच्छा काम करेंगे, तो टीम का नाम होगा। टीम का नाम होगा, तो बॉस की तारीफ होगी। और जब बॉस प्रमोट होकर ऊपर जाएगा, तो उसकी खाली कुर्सी पर कौन बैठेगा? आप। जो लोग अपने बॉस को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं या उन्हें ‘बाईपास’ (Bypass) करके सुपर-बॉस के पास जाते हैं, वो अक्सर राजनीति का शिकार हो जाते हैं। अपने बॉस के लक्ष्यों (Goals) को अपना लक्ष्य बना लें।

5. कमिटमेंट वही करें जो पूरा कर सकें

नया-नया जोश में हम अक्सर बॉस को खुश करने के लिए बोल देते हैं—“जी सर, यह काम तो मैं कल तक कर दूंगा।” जबकि आपको पता है कि इसमें 3 दिन लगेंगे।

जब आप कमिटमेंट पूरा नहीं कर पाते, तो भरोसा (Trust) टूटता है। और कॉर्पोरेट में ट्रस्ट ही करेंसी है। हमेशा थोड़ा समय एक्स्ट्रा मांगें। “सर, इसमें 3 दिन लगेंगे।” और फिर उसे 2 दिन में करके दे दें। बॉस खुश हो जाएगा—“वाह! इसने तो डेडलाइन से पहले कर दिया।” लेकिन अगर आप 1 दिन बोलकर 2 दिन में देंगे, तो काम वही है, लेकिन आप ‘लेट’ कहलाएंगे। खेल सिर्फ उम्मीदों (Expectations) को मैनेज करने का है।

6. इंसानियत का रिश्ता

बॉस कोई रोबोट नहीं है। उसके भी घर में दिक्कतें हो सकती हैं, उसकी भी तबीयत खराब हो सकती है, उसे भी स्ट्रेस होता है। कभी-कभी काम से हटकर उनसे बात करें। “सर, वीकेंड कैसा रहा?” “मैम, आपकी बेटी का एग्जाम कैसा हुआ?”

यह चमचागिरी नहीं है, यह Empathy (सहानुभूति) है। जब आप उन्हें एक इंसान की तरह ट्रीट करते हैं, तो वो भी आपको सिर्फ एक ‘रिसोर्स’ नहीं, बल्कि एक इंसान की तरह देखते हैं। जिस दिन आपका बॉस आपके साथ पर्सनल लेवल पर कनेक्ट हो गया, उस दिन से आपकी छोटी-मोटी गलतियां माफ होनी शुरू हो जाएंगी।

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7. सब कुछ लिखित में रखें

भले ही आपके बॉस से रिश्ते बहुत अच्छे हों, लेकिन काम की बातें हमेशा ईमेल पर होनी चाहिए। कई बार बॉस काम के प्रेशर में कुछ बोल देते हैं और बाद में भूल जाते हैं। “अरे, मैंने कब कहा था कि यह काम छोड़ दो?”

ऐसे में बहस करने से रिश्ते खराब होते हैं। स्मार्ट तरीका यह है कि मीटिंग के बाद एक छोटा सा ईमेल डाल दें: “Hi Sir, as discussed in the meeting, I am prioritizing Project A and holding Project B for now.”

यह आपकी सुरक्षा (Safety) है और प्रोफेशनलिज्म की निशानी भी।

बॉस को मैनेज करना कोई रॉकेट साइंस नहीं है। यह बस कम्युनिकेशन और कॉमन सेंस का खेल है। बॉस से डरना बंद कीजिये। वो आपकी करियर की सीढ़ी का सबसे महत्वपूर्ण पायदान हैं।

अगर आप उनका काम आसान करेंगे, उनका तनाव कम करेंगे और भरोसेमंद रहेंगे, तो वो ढाल (Shield) बनकर आपकी रक्षा करेंगे—चाहे रिसेशन आए या ऑफिस पॉलिटिक्स।

तो कल जब ऑफिस जाएं, तो एक नई सोच के साथ जाएं। बॉस “विलेन” नहीं है, वो बस एक और इंसान है जो अपनी नौकरी बचाने की कोशिश कर रहा है। उसकी मदद कीजिये, आपकी मदद अपने आप हो जाएगी।

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