Office Politics से कैसे बचें: दफ्तर के ‘महाभारत’ में अभिमन्यु न बनें

“भाई, तूने सुना? शर्मा जी को प्रमोशन काम की वजह से नहीं, ‘मक्खन’ लगाने की वजह से मिला है।” यह लाइन आपने कभी न कभी पेंट्री में, चाय की टपरी पर, या वॉशरूम में जरूर सुनी होगी। सच कड़वा है, लेकिन सुन लो: जहां 4 लोग काम करते हैं, वहां पॉलिटिक्स होगी ही। चाहे वो गूगल का ऑफिस हो या आपके शहर की सरकारी बिल्डिंग।

बहुत से लोग सोचते हैं—“मैं तो सिर्फ काम करने जाता हूँ, मुझे इन सब से क्या मतलब?” दोस्त, आप पॉलिटिक्स में रुचि नहीं लेते, लेकिन पॉलिटिक्स आप में रुचि लेती है। अगर आप आँख बंद करके सिर्फ कोडिंग या एक्सेल शीट में लगे रहेंगे, तो कोई और आपका क्रेडिट ले जाएगा, और आप बस देखते रह जाएंगे।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप भी ‘शकुनि मामा’ बन जाएं। आपको ‘कीचड़’ में रहना है, लेकिन खुद पर कीचड़ लगने नहीं देना है। इसे कहते हैं Diplomacy

आज हम बात करेंगे कि ऑफिस की गंदी राजनीति (Dirty Politics) से खुद को कैसे बचाएं, अपनी मानसिक शांति (Mental Peace) कैसे बनाए रखें और बिना किसी की ‘चमचागिरी’ किए आगे कैसे बढ़ें।

Office Politics से कैसे बचें | Avoiding Office Politics

1. पहचानें ‘खिलाड़ियों’ को

युद्ध लड़ने से पहले यह पता होना चाहिए कि दुश्मन कौन है और दोस्त कौन। हर ऑफिस में कुछ खास तरह के किरदार (Characters) होते हैं:

  • नारद मुनि (The Gossiper): यह इंसान इधर की बात उधर करने में माहिर होता है। यह आपके पास आएगा और कहेगा, “यार, वो तुम्हारे बारे में ऐसा बोल रहा था…” ताकि आप भड़क जाएं। इनसे 100 कदम दूर रहें।
  • द क्रेडिट चोर (The Credit Stealer): आप रात भर जागकर प्रेजेंटेशन बनाएंगे, और मीटिंग में यह कहेगा—“जैसा कि ‘हम’ सोच रहे थे…” और सारा क्रेडिट ले जाएगा।
  • बॉस का चमचा (The Yes-Man): इसकी कोई अपनी राय नहीं होती। बॉस अगर दिन को रात कहे, तो यह कहेगा “जी सर, तारे दिख रहे हैं।”

इन लोगों से लड़ना नहीं है, बस इन्हें पहचान कर सतर्क (Alert) रहना है।

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2. ‘स्विट्ज़रलैंड’ बन जाएं

जब दो गुटों (Groups) में लड़ाई हो रही हो, तो सबसे समझदार देश कौन सा होता है? स्विट्ज़रलैंड। क्योंकि वो किसी की तरफ नहीं होता।

ऑफिस में अक्सर गुटबाजी होती है। “तुम पूजा की टीम में हो या राहुल की?” आपका जवाब होना चाहिए—“मैं कंपनी की टीम में हूँ।”

  • टिप: जब कोई आपके सामने किसी तीसरे की बुराई करे, तो मौन (Silence) रहें। न “हाँ” कहें, न “ना”। बस हल्का सा मुस्कुराएं और कहें—“अच्छा? मुझे इस बारे में पता नहीं,” और काम में लग जाएं।
  • अगर आप बुराई में शामिल होंगे, तो वो इंसान जाकर दूसरे को बोलेगा कि “वो भी तुम्हारे बारे में यही कह रहा था।” और फंसेंगे आप।

3. सब कुछ लिखित में रखें

यह ऑफिस पॉलिटिक्स से बचने का ‘ब्रह्मास्त्र’ है। जुबानी बातों का कोई भरोसा नहीं। अगर आपके बॉस ने या सहकर्मी ने कहा—“तुम यह काम कर दो, मैं देख लूंगा।” तो भरोसा मत करो।

तुरंत एक ईमेल भेजो: “As discussed, I am starting working on XYZ task based on your suggestion.”

इसे CYA (Cover Your Ass) तकनीक कहते हैं। कल को अगर प्रोजेक्ट फेल हुआ और वो पलट गया कि “मैंने तो ऐसा कहा ही नहीं था,” तो आपके पास सबूत (Proof) होगा। ईमेल का ‘ट्रेल’ ही आपका असली वकील है।

4. अपना काम इतना मज़बूत रखो कि कोई हिला न सके

लोग पॉलिटिक्स का शिकार तब होते हैं जब उनका काम कमजोर होता है। अगर आप अपने काम में इक्के (Ace) हैं, तो लोग आपकी टांग खींचने से पहले दस बार सोचेंगे।

  • डेडलाइन कभी मिस मत करो।
  • मीटिंग में तैयारी के साथ जाओ।
  • नई स्किल सीखते रहो।

याद रखना, “काम बोलता है।” अगर आप कंपनी के लिए रेवेन्यू ला रहे हैं या प्रॉब्लम सॉल्व कर रहे हैं, तो बॉस को भी पता है कि आपको खोना महंगा पड़ेगा, चाहे कोई आपके खिलाफ कितनी भी चुगली क्यों न कर ले।

5. निजी बातें निजी रखें

ऑफिस के लोग आपके ‘दोस्त’ हो सकते हैं, लेकिन वे आपके ‘बचपन के यार’ नहीं हैं। भावुक होकर अपनी पर्सनल लाइफ की बातें शेयर करना बंद करें।

“मैं दूसरी नौकरी ढूंढ रहा हूँ।” “मुझे बॉस का काम करने का तरीका पसंद नहीं है।” “मेरे घर में क्लेश चल रहा है।”

यह जानकारी बारूद है। अगर आपकी किसी से खटपट हो गई, तो यही जानकारी आपके खिलाफ इस्तेमाल की जाएगी। ऑफिस में प्रोफेशनल बनें। मौसम की बातें करें, क्रिकेट की बातें करें, लेकिन अपनी कमजोरियां या प्लान किसी को न बताएं।

6. गॉसिप का ‘डेंड एंड’ बनें

गॉसिप (Gossip) एक आग की तरह है, इसे जलने के लिए हवा चाहिए। जब कोई आपके पास कोई मसालेदार खबर लेकर आए, तो उसे हवा मत दो।

  • गॉसिपर: “तुझे पता है, नेहा का डिवोर्स हो रहा है?”
  • आप: “ओह, यह तो दुखद है। वैसे, क्या तुमने मुझे वो रिपोर्ट भेजी? मुझे क्लाइंट को देनी है।”

देखा आपने क्या किया? आपने टॉपिक को मार दिया और वापस काम पर आ गए। जब लोगों को लगेगा कि आपको मसाले में कोई इंट्रेस्ट नहीं है, तो वो आपके पास कचरा लेकर आना बंद कर देंगे।

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7. गुस्सा आने पर 24 घंटे का नियम

पॉलिटिक्स का एक मकसद होता है—आपको उकसाना। कोई आपको नीचा दिखाएगा, कोई सीसी (CC) में बॉस को रखकर आपको रूड ईमेल भेजेगा। उनका मकसद है कि आप गुस्सा करें, चिल्लाएं या रूड रिप्लाई करें, ताकि आप ‘बुरे’ दिखें।

जाल में मत फंसो। अगर कोई ऐसा ईमेल आए जिससे खून खौल जाए, तो तुरंत रिप्लाई मत करो। 24 घंटे रुको। ठंडे दिमाग से सोचो और फिर एक प्रोफेशनल और लॉजिकल जवाब दो। भावनाओं में बहकर भेजा गया ईमेल आपके करियर का ‘सुसाइड नोट’ बन सकता है।

8. अपने ‘गॉडफादर’ या मेंटर ढूंढें

अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता। ऑफिस में पॉलिटिक्स से बचने के लिए आपके पास “Allies” (सहयोगी) होने चाहिए। जरूरी नहीं कि वो आपका बॉस ही हो। वो कोई सीनियर हो सकता है, या दूसरे डिपार्टमेंट का कोई मैनेजर।

ऐसे लोगों से अच्छे रिश्ते बनाएं जो पावरफुल हैं और जिनकी कंपनी में अच्छी साख (Reputation) है। अगर कल को कोई आपके खिलाफ साजिश करता है, तो आपके पास कोई ऐसा होना चाहिए जो मीटिंग में कह सके—“नहीं, मैं राहुल को जानता हूँ, वो ऐसा नहीं कर सकता।”

दोस्त, ऑफिस पॉलिटिक्स घर की धूल की तरह है। आप इसे पूरी तरह खत्म नहीं कर सकते, लेकिन आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि यह आपके ऊपर न जमे।

आपको चालाक बनने की ज़रूरत नहीं है, बस जागरूक (Aware) रहने की ज़रूरत है।

  • अपना काम ईमानदारी से करें।
  • जुबान पर काबू रखें।
  • और हर चीज़ का सबूत रखें।

अंत में, याद रखें कि आप वहां सैलरी लेने जाते हैं, रिश्तेदारी निभाने या इलेक्शन लड़ने नहीं। अपना काम करो, चेक लो, और अपनी असली ज़िन्दगी (जो ऑफिस के बाहर है) को एन्जॉय करो।

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